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रहे ना रहे हम  महका करेंगे
बन के कली, बन के सबा, बाग-ए-वफां में

मौसम कोई हो इस चमन में रंग बन के रहेंगे हम खिरामा
चाहत की खुशबू यूँ ही जुल्फों से उडेगी, खिजा हो या बहारें
यूँ ही झूमते और खिलते रहेंगे, बन के कली..

खोये हम ऐसे, क्या हैं मिलना, क्या बिछडना नहीं हैं याद हम को
कूंचे में दिल के जब से आये सिर्फ दिल की जमीन हैं याद हम को
इसी सरजमीं पे हम तो रहेंगे, बन के कली..

जब हम ना होंगे, जब हमारी खांक पे तुम रुकोगे चलते चलते
अश्कों से भीगी चांदनी में एक सदा सी सुनो गे चलते चलते
वही पे कही हम तुम से मिलेंगे, बन के कली..

http://www.youtube.com/watch?v=FRdqoJPc6bQ

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